खयाल आती है।।।

 ख़यालो को कविता बनाने दो।

फुर्सत के पल मिले है, नजर ना लगे काला टीका तो लगाने दो।।

उलझा है, जिंदगी का सफर, 

डगमगा रही है साइकिल, सपोर्ट है बेअसर,

साथ में चलने के लिए एक्स्ट्रा चक्के तो लगाने दो।

रुको तो सही, ख़यालो को कविता बनाने दो।


~ प्रकाश राठौर

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