तिहार के महत्ता, आडंबर या आचरण

 होली है भाई होली,

ये अवसर है होलिका दहन का, अंत बुरे का नहीं बुराई का।

होलिका एक चरित्र है, कर्तव्य परायण तो वो भी थी।।

अवसर है, सही और ग़लत कर्तव्यों के चयन का।

अपने  अहंकार को तज के, प्रहलाद को ममतामई गोद में बिठाने का।।

होलिका जली, मुक्ति मिली।।।। 

लाई खुशियां, भक्ति मिली।।।।

रंगो ने भर दिए, हर एक भेद।।

इसलिए बुरा ना मानो, मत करो खेद।।।

होली की मस्ती भरी प्रकाश से ओतप्रोत शुभकामनाएं।।।

होलिका जिस संभावित ग्राम में जन्म ली आज भी उन्हें बेटी की तरह पूजा जाता है, उन्हें अहंकार था, जो की उनके अग्नि द्वारा दमन के साथ अंत हुआ, किंतु आज भी हम होलिका दहन के अवसर पर अपने दुष्ट आचरण को नहीं जला पाते। 


 ~ प्रकाश राठौर 🌄

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